कन्ज़ुल ईमान | Kanzul Iman

- श्रेणी: Islamic | इस्लामी उर्दू / Urdu
- लेखक: इमाम अहमद रज़ा ख़ान - Imam Ahmad Raza Khan
- पृष्ठ : 1225
- साइज: 55 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में कुरआन के तरजमे "कन्जुल ईमान" और उसकी तफ्सीर "खजाइनुल इरफ़ान" का उल्लेख किया गया है। इसे हजरत इमाम अहमद रजा खान ने उर्दू में लिखा है और हजरत मौलाना मुहम्मद नईमुद्दीन मुरादआबादी ने इसकी तफ्सीर प्रदान की है। मजलिसे अल मदीनतुल इल्मिय्या ने इस तरजमे और तफ्सीर पर काम करके इसे हिंदी में प्रस्तुत किया है। पाठ में मुनाफिकों (द्वि-स्वरूपियों) की विशेषताओं और उनके कृत्यों का वर्णन किया गया है, जैसे कि वे मुसलमानों के साथ मिलकर दिखावा करते हैं जबकि उनके दिल में कुफ्र होता है। इस तरह के लोगों को अल्लाह की ओर से चेतावनी दी जा रही है कि वे दीन के प्रति अपने रवैये में सावधान रहें। कुरआन की आयतों के माध्यम से यह बताया गया है कि हिदायत के बदले गुमराही खरीदने वाले लोगों का अंत बुरा होता है। ये लोग हिदायत को छोड़कर गुमराही को अपनाते हैं, जिससे उनका अंत हसरत और अफसोस में होता है। पाठ में बताया गया है कि जैसे बारिश जीवन का कारण है, उसी तरह कुरआन और इस्लाम दिलों की हयात का माध्यम हैं। इसमें मुनाफिकों के व्यवहार को अंधेरी रात और बिजली की चमक के उदाहरण से समझाया गया है, जिसमें वे कभी इस्लाम की ओर आकर्षित होते हैं और जब स्थिति कठिन होती है, तो पलट जाते हैं। अंत में, पाठ में यह संदेश दिया गया है कि मुसलमानों को अल्लाह की राह पर चलना चाहिए और मुनाफिकों की फरेब से बचना चाहिए।
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