चरक संहिता | Charaka Samhita

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद Homoeopathic and Medical Sciences | होमियोपैथिक और चिकित्सा
- लेखक: पं. राजेश्वरदत्त शास्त्री - Pt. Rajeshwar Dutt Shastri सत्य नारायण शास्त्री - Satya Narayan Shastri
- पृष्ठ : 1116
- साइज: 53 MB
- वर्ष: 1962
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दो शब्द :
यह पाठ आयुर्वेद के एक महत्वपूर्ण ग्रंथ, "चरक संहिता", पर आधारित है। इसमें आयुर्वेद के सिद्धांत, चिकित्सा पद्धतियाँ और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आवश्यक ज्ञान का संकलन किया गया है। ग्रंथ में विभिन्न प्रकार की चिकित्सा प्रक्रियाएँ, औषधियों के उपयोग और रोगों के उपचार के तरीके विस्तार से वर्णित हैं। इसमें न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है। पाठ में यह भी बताया गया है कि आयुर्वेद का ज्ञान कैसे प्राचीन ऋषियों और चिकित्सकों द्वारा विकसित किया गया था, और यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता आया है। आयुर्वेद को एक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें रोगों की पहचान, निदान और उपचार की प्रक्रियाएँ शामिल हैं। इसके अलावा, पाठ में आयुर्वेद के महत्व और इसके प्रभावी उपयोग के बारे में जानकारी दी गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली कितनी महत्वपूर्ण है। इस ग्रंथ का उद्देश्य न केवल रोगों का उपचार करना है, बल्कि स्वास्थ्य को बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता को सुधारने पर भी ध्यान केंद्रित करना है।
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