शांगघर संहिता | Shanghar Sanhita

By: खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadas


दो शब्द :

इस पाठ में आयुर्वेद की उत्पत्ति, विकास और इसके प्रमुख ग्रंथों का वर्णन किया गया है। आयुर्वेद चार वेदों का सारभूत उपवेद माना जाता है, जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के तत्वों का समावेश है। आचार्य चरक और आचार्य सुश्रुत जैसे महान चिकित्सकों ने आयुर्वेद की प्रमुख संहिताएँ लिखीं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि आयुर्वेद का इतिहास अनादिकाल से है और इसके रचनाकारों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि, आचार्य आत्रेय ने आयुर्वेद के ज्ञान को चारों वेदों से निकाला और इसे विकसित किया। इस ग्रंथ का उद्देश्य आयुर्वेद के ज्ञान को हिन्दी में प्रस्तुत करना है ताकि इसे अधिक से अधिक लोग समझ सकें। पाठ में बताया गया है कि इस ग्रंथ में तीन खंड हैं, जिनमें विभिन्न औषधियों, उनके योग, और चिकित्सा संबंधी जानकारी दी गई है। अंत में, लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो तो उसे सुधारने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पाठकों को सही जानकारी मिल सके। यह पाठ आयुर्वेद के अध्ययन में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयोगी है।


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