मानसिक आरोग्य | Manasik Arogya

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद साहित्य / Literature
- लेखक: लाजजी राम शुक्ल - lalji ram shukl
- पृष्ठ : 430
- साइज: 19 MB
- वर्ष: 1945
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दो शब्द :
इस पाठ में मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक रोगों की चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि मानसिक रोग अब एक सामान्य समस्या बन गई है, और इसके बढ़ते मामलों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक उपायों की आवश्यकता है। मानसिक रोग अक्सर छिपे होते हैं, जिससे व्यक्ति और उसके आसपास के लोग इसे पहचान नहीं पाते। मानसिक स्वास्थ्य को समझना न केवल दूसरों की मदद करने के लिए, बल्कि स्वयं को समझने और मानसिक संतुलन को पुनः प्राप्त करने के लिए भी आवश्यक है। लेखक ने यह बताया कि मानसिक रोगों का मुख्य कारण व्यक्ति के मन में छिपी हुई मानसिक ग्रंथियाँ होती हैं। इन ग्रंथियों को समझना और उन्हें प्रकाश में लाना जरूरी है ताकि व्यक्ति अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुधार सके। स्वस्थ मनुष्य दूसरों को भी स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। पुस्तक का उद्देश्य उन लोगों के लिए है जो अपनी मानसिक समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना चाहते हैं। इसमें कुछ उदाहरण भी दिए गए हैं ताकि पाठक दूसरों के अनुभवों से प्रेरित होकर अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुधार सकें। लेखक ने यह भी बताया कि मानसिक रोग तब उत्पन्न होते हैं जब व्यक्ति उन्हें स्वीकार करता है। इसके लिए व्यक्ति को अपने भीतर की सोच को समझना और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाना आवश्यक है। मानसिक शांति और आरोग्य एक ही तथ्य के दो पहलू हैं। अगर व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा में चलाए, तो वह मानसिक रोगों से बच सकता है। अंत में, लेखक ने विभिन्न मनोवैज्ञानिकों के विचारों का उल्लेख किया है और यह विश्वास व्यक्त किया है कि पाठक इस पुस्तक से अपने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में विचार करने के लिए प्रेरित होंगे।
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