शकुंतला | The Shakuntala

- श्रेणी: अंग्रेजी / English पाठ्यपुस्तक / Textbook साहित्य / Literature
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 172
- साइज: 15 MB
- वर्ष: 1800
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दो शब्द :
इस पाठ में एक संवाद के माध्यम से दो मुख्य पात्रों, दुष्प्रज्ञ और उनके पुरोहित के बीच की बातचीत दर्शाई गई है। दुष्प्रज्ञ अपनी विवाहिता को छोड़ने और पराई स्त्री को अपनाने के बीच उलझन में हैं। वह अपने पुरोहित से पूछते हैं कि इनमें से कौन सा पाप बड़ा है। पुरोहित उनके मामले में एक तीसरा विकल्प सुझाते हैं, जिसमें वह अपनी विवाहिता को तब तक अपने पास रख सकते हैं जब तक उनका पुत्र जन्म नहीं ले लेता। पुरोहित यह भी बताते हैं कि ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की है कि दुष्प्रज्ञ का पुत्र चक्रवर्ती होगा, जिससे यह निर्णय लिया जा सकता है कि अगर पुत्र के लक्षण चक्रवर्ती जैसे पाए जाते हैं, तो विवाहिता को छोड़ दिया जाए। इसके बाद, शकुंतला नामक पात्र का उल्लेख होता है, जो अपने भाग्य की निंदा करती है। अचानक एक अप्सरा आती है और शकुंतला को अपने साथ ले जाती है। दुष्प्रज्ञ अपनी स्थिति को लेकर चिंतित हैं और इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका विवाह कब हुआ। इसके साथ ही, एक नया पात्र कुम्भिलक सामने आता है, जो एक अंगूठी के बारे में बताता है, जिसका संबंध दुष्प्रज्ञ से है। कुल मिलाकर, पाठ में विवाह, पाप, भविष्यवाणी और भाग्य के मुद्दे पर विचार किया गया है, जिसमें पात्रों के बीच संवाद और उनके अंतर्द्वंद्व को प्रमुखता दी गई है।
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