प्रयोग मणि माला | Prayog Mani Mala

By: वैद्य बांकेलाल गुप्त - Vaidya Bankelal Gupta
प्रयोग मणि माला  | Prayog Mani Mala by


दो शब्द :

इस पाठ में एक प्रकाशक द्वारा एक महत्वपूर्ण पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया और उसके पीछे की कहानी का विवरण है। लेखक ने बताया है कि उन्होंने 30 साल पहले धन्वन्तरि कार्यालय की स्थापना की थी और इसके साथ ही धन्वन्तरि मासिक पत्रिका का प्रकाशन भी शुरू किया। समय के साथ, उनके बहनोई का निधन हो गया और उनके दोनों पुत्रों ने कुछ कटु व्यवहार दिखाना शुरू कर दिया, जिससे स्थिति में तनाव उत्पन्न हुआ। लेखक ने पुस्तक के प्रकाशन के लिए गुप्त प्रयोगों का आयोजन किया और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने कई सहृदय वैद्यों से सहयोग प्राप्त किया और प्रयोगों को संकलित किया। हालांकि, प्रकाशन में कई बाधाएँ आईं, लेकिन अंततः पुस्तक को प्रकाशित करने में सफलता मिली। लेखक ने पाठकों से अपील की है कि वे अपने प्रयोगों को साझा करें ताकि भविष्य में और भी पुस्तकें प्रकाशित की जा सकें। उन्होंने अपने सहायक, श्री मणीन्द्रकुमार ज्ञी मुखर्जी के निधन की भी सूचना दी, जो इस पुस्तक के प्रकाशन में उनके प्रमुख सहयोगी थे। अंत में, लेखक ने पाठकों से इस पुस्तक के प्रति अपनी प्रतिक्रिया देने की अपील की है और बताया है कि अगले भाग के प्रकाशन की योजना है।


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