हिन्दू पद-पादशाही | Hindu Pad-Padshahi

- श्रेणी: धार्मिक / Religious साहित्य / Literature हिंदू - Hinduism
- लेखक: वीर सावरकर - Veer Savarkar
- पृष्ठ : 258
- साइज: 14 MB
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दो शब्द :
पुस्तक "हिन्द पद-पादशाही" का उद्देश्य यह है कि राष्ट्र अपने प्राचीन गौरव को भूलने के कारण अपनी राष्ट्रीयता को खो देता है। स्वातन्त्र्य-वीर सावरकर ने यह पुस्तक कालेपीनो की नारकोटिक थेरपी के दौरान लिखी, जब वह नजर्बंद थे। इस पुस्तक में 17वीं और 18वीं शताब्दी के हिन्दू राज्य की नींव रखने के प्रयासों का वर्णन किया गया है। सावरकर का मानना है कि राष्ट्र का इतिहास एक अमूल्य सम्पत्ति है, जिसे सुरक्षित रखना आवश्यक है। लेखक ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र का इतिहास स्पष्ट होने के बाद, अब हमें अपने इतिहास की जानकारी के लिए केवल विदेशी इतिहासकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सावरकर ने अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा कि हिन्दू राष्ट्र की जागृति के लिए यह पुस्तक महत्वपूर्ण है। इतिहास का अध्ययन करते हुए, लेखक ने यह स्पष्ट किया कि इतिहास की घटनाओं को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करना चाहिए, बिना किसी पूर्वाग्रह के। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दू और मुस्लिम दोनों की एकता की आवश्यकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब दोनों पक्ष एक समान शक्ति के रूप में खड़े हों। पुस्तक में महान योद्धाओं और नेताओं का उल्लेख किया गया है जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र को स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष किया। अंत में, यह पुस्तक सभी भारतीय देशभक्तों के लिए अध्ययन करने के योग्य है, ताकि वे अपने इतिहास को समझ सकें और भविष्य में एकता की दिशा में आगे बढ़ सकें।
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