प्रेमचंद घर में | Premchand Ghar Me

By: शिवरानी देवी प्रेमचन्द - Shivrani Devi Premchand
प्रेमचंद घर में |  Premchand Ghar Me by


दो शब्द :

यह पाठ शिवरानी देवी द्वारा लिखित है, जिसमें उन्होंने महान साहित्यकार प्रेमचंद के जीवन और व्यक्तित्व का वर्णन किया है। लेखिका ने प्रेमचंद के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए उनकी मानवता, ईमानदारी और संवेदनशीलता को उजागर किया है। लेखिका ने बताया है कि वे दोनों जीवन के कठिनाइयों और सुख-दुख में एक साथ थे, जिससे उन्हें प्रेमचंद की विशालता का अनुभव हुआ। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को प्रेमचंद के साहित्य और उनकी आदमियत के बारे में समझाना है। लेखिका ने अपनी लेखनी में ईमानदारी को प्राथमिकता दी है और घटनाओं को यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया है। वह स्वीकार करती हैं कि कहीं-कहीं घटनाएँ समय क्रम में नहीं हो सकती हैं और कुछ भूलें हो सकती हैं, लेकिन उन्होंने सचाई को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा, पाठ में प्रेमचंद के बचपन की कुछ घटनाओं का भी उल्लेख है, जैसे उनकी पढ़ाई, परिवार और बचपन के अनुभव, जो उनके व्यक्तित्व को समझने में मदद करते हैं। लेखिका ने यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने प्रेमचंद के गुणों का बखान करने में कोई अतिशयोक्ति नहीं की है, बल्कि उनके जीवन के वास्तविक अनुभवों को साझा किया है। सारांश में यह स्पष्ट होता है कि शिवरानी देवी ने प्रेमचंद को उनके मानवीय गुणों और साहित्यिक योगदान के लिए याद किया है और पाठकों को उनके जीवन की गहराई में ले जाने का प्रयास किया है।


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