कृषि-विज्ञानं | Agriculture science

- श्रेणी: Agriculture and Environment | कृषि और पर्यावरण विज्ञान / Science साहित्य / Literature
- लेखक: शीतल प्रसाद तिवारी - Shital Prasad Tiwari
- पृष्ठ : 435
- साइज: 34 MB
- वर्ष: 1926
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दो शब्द :
इस पाठ में कृषि विज्ञान के महत्व और भारतीय किसानों की स्थिति पर चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि भारत में किसान अभी भी पारंपरिक तरीकों से कृषि करते हैं, जबकि पश्चिमी देशों में विज्ञान और आधुनिक तकनीक का उपयोग करके कृषि में प्रगति की जा रही है। भारतीय किसान की कठिनाइयों, जैसे कि सीमित संसाधन और पुरानी तकनीक, के माध्यम से लेखक ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि विज्ञान की मदद से कृषि में सुधार किया जा सकता है। लेखक ने किसानों को विज्ञान से जुड़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है। उनका कहना है कि यदि भारतीय किसान भी पश्चिमी देशों की तरह विज्ञान का उपयोग करें, तो वे न केवल अपनी कृषि उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपने जीवन स्तर में भी सुधार ला सकते हैं। लेखक ने भारतीय किसानों की तुलना अमेरिकी किसानों से की है, जहां एक अमेरिकी किसान आधुनिक यंत्रों का उपयोग करके कम समय में अधिक उत्पादन कर रहा है, जबकि भारतीय किसान मेहनत के बावजूद कम उत्पादन कर रहा है। इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि भारतीय किसानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके कृषि में सुधार करना चाहिए, ताकि वे भी विकासशील देशों की श्रेणी में आ सकें और अपने जीवन को बेहतर बना सकें।
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