ब्रह्मचर्य | Brahmacharya

- श्रेणी: ज्ञान विधा / gyan vidhya ब्रह्मचर्य/ Brahmcharya
- लेखक: मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi
- पृष्ठ : 206
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1939
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश महात्मा गांधी के विचारों और अनुभवों पर आधारित है, जिसमें उन्होंने ब्रह्मचर्य और संयम के महत्व पर प्रकाश डाला है। गांधी जी अपने जीवन में संयम का पालन करते हुए आत्म-निरीक्षण करते हैं और अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं। उन्होंने यह महसूस किया कि उनका स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें गीता के संदेश को और गहराई से समझने का अवसर मिला। गांधी जी ने बताया कि असाधारण सावधानी और डॉक्टरों की सलाह के कारण उन्हें आराम करने का अवसर मिला, जिससे उन्होंने अपने जीवन की कई गहराइयों पर विचार किया। उन्होंने अपने अनुभवों से सीखा कि जो व्यक्ति प्रकृति के नियमों का पालन करता है, उसे बुढ़ापे का अनुभव नहीं होता। इसके अतिरिक्त, पाठ में एक छात्रा के पत्र का उल्लेख है, जिसमें वह समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अशिष्टता के बारे में चिंता व्यक्त करती है। उसने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे वह अकेली होने पर असामाजिक तत्वों का सामना करती है। गांधी जी ने इस पत्र का उत्तर देने की आवश्यकता महसूस की और इस विषय पर विचार करने का निर्णय लिया। गांधी जी के विचारों में अहिंसा और प्रेम का महत्व स्पष्ट है, और वे सभी को प्रेरित करते हैं कि वे संयम और आत्म-नियंत्रण का पालन करें, जिससे वे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।
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