भोजपुरी लोक साहित्य का अध्ययन | Bhojapuri Loka Sahitya Ka Adhyayan

By: कृष्णदेव उपाध्याय - Krishndev upadhyay


दो शब्द :

इस पाठ में भोजपुरी लोक-साहित्य के संरक्षण और अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। लेखक ने बताया है कि किसी देश की वास्तविक संस्कृति उसके लोक-साहित्य में पाई जाती है, और इसे सुरक्षित रखने के लिए इसका संरक्षण आवश्यक है। लेखक ने भोजपुरी लोक-साहित्य के संग्रह की प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों का वर्णन किया है, जिसमें गीतों और गाथाओं के संग्रह के लिए विशेष समय और प्रयास लगाना पड़ा है। लेखक ने भोजपुरी लोक-साहित्य को चार प्रमुख वर्गों में विभाजित किया है: लोक-गीत, लोक-गाथा, लोक-कथा और प्रकीर्ण-साहित्य। उन्होंने भोजपुरी भाषा और उसके साहित्य का परिचय देते हुए इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की है। लोक-गीतों की परंपरा, उनके वर्गीकरण, और भारतीय संस्कृति में उनके स्थान की भी विवेचना की गई है। इसके अतिरिक्त, लेखक ने लोक-गाथाओं और लोक-कथाओं के संबंध में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की है। उन्होंने लोक-साहित्य के विभिन्न अंगों की समीक्षा की है और भोजपुरी लोक-साहित्य की विशेषताओं को उजागर किया है। अंत में, लेखक ने उन लोगों का आभार व्यक्त किया है जिन्होंने इस काम में उनकी सहायता की। इस प्रकार, पाठ भोजपुरी लोक-साहित्य के महत्व, उसके संरक्षण की आवश्यकता, और इसके विभिन्न पहलुओं का एक समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *