श्री दत्तात्रय ज्ञानकोष | Shri Dattatraya Gyankosh

By: प्रल्हाद नरहर जोशी - Dr Pralhad Narhar Joshi


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह लेख "श्रीदत्तात्रेय-ज्ञानकोश" पर केंद्रित है, जिसे डॉ. भ्रत्हाद नरहर जोक्षी ने लिखा है। लेखक ने इस पुस्तक के प्रकाशन की कठिनाइयों और उसके विकास की प्रक्रिया का वर्णन किया है। लेख में बताया गया है कि दत्तात्रेय को लेकर एक कोश के निर्माण का विचार पहले से ही था, लेकिन विभिन्न व्यावहारिक बाधाओं के कारण इसे समय पर पूरा नहीं किया जा सका। लेख में दत्तात्रेय की महिमा, उनके भक्तों की परंपरा, उनके उपासना स्थल और दत्तोपासक समुदाय की विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि दत्त की उपासना के पीछे का उद्देश्य केवल भौतिक लाभ नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रेम और आशीर्वाद प्राप्त करना है। इस ग्रंथ में दत्तात्रेय के स्वरूप, इतिहास, चरित्र, उपासना विधि और अन्य महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। लेखक ने विभिन्न दत्तस्थानों और उनके महत्व का भी वर्णन किया है। अंत में, लेखक ने पुस्तक के प्रकाशन में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया है और यह विश्वास जताया है कि यह ग्रंथ पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने दत्तप्रभू की कृपा और प्रेरणा का भी उल्लेख किया है, जिससे इस कार्य को पूरा करने में मदद मिली।


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