शिवसंहिता | ShivaSamhita

- श्रेणी: धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: गोस्वामी श्री राम चरण पुरी - Goswami Shri Ram Charan Puri
- पृष्ठ : 212
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1913
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दो शब्द :
यह पाठ विभिन्न योग और तंत्र विद्या से संबंधित ज्ञान को प्रस्तुत करता है, जिसमें प्रमुख रूप से "शिवसंहिता" का उल्लेख है। इसमें योग साधना, विभिन्न मुद्राओं, और ध्यान की विधियों पर प्रकाश डाला गया है। पाठ में यह बताया गया है कि साधक को अपने मन और प्राणों को नियंत्रित करके सिद्धियों की प्राप्ति करनी होगी। शिवसंहिता में योगियों के लिए विभिन्न ध्यान और साधना विधियों का वर्णन किया गया है, जैसे कि "खेचरी मुद्रा," "उड्डयन बन्ध," और "राजयोग।" ये सभी विधियाँ साधक को आत्मज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाती हैं। इसके अलावा, पाठ में यह भी बताया गया है कि साधक को अपने इंद्रियों पर नियंत्रण और ध्यान की निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। पाठ में विभिन्न स्थानों का, जैसे मूलाधार, स्वाधिष्ठान, और आज्ञाचक्र का वर्णन किया गया है, जहाँ पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इन स्थानों की शक्ति और महत्व को समझाते हुए, साधकों को अपने ध्यान में स्थिरता लाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। अंत में, पाठ में यह उल्लेख किया गया है कि साधक को अपनी साधना में निरंतरता बनाए रखनी चाहिए और गुरु की कृपा से ही सच्चा ज्ञान और सिद्धि प्राप्त हो सकती है। इस प्रकार, यह पाठ योग और तंत्र की गहराई में जाकर साधकों को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
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