योग-मनोविज्ञान | Yog-Manovigyan

By: शांति प्रकाश आत्रेय - Shanti Prakash Atreya
योग-मनोविज्ञान | Yog-Manovigyan by


दो शब्द :

इस पाठ में योग विद्या और उसके महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक डा. शान्ति प्रकाश झात्ेय ने योग के सिद्धांतों और उनके मनोवैज्ञानिक पहलुओं का विस्तृत वर्णन किया है। योग विद्या का इतिहास प्राचीन है और इसे स्वास्थ्य, सुंदरता और आत्म ज्ञान के लिए आवश्यक माना गया है। वेदों में योग का उल्लेख है, जिसे ऋषियों ने मानवता के विकास के लिए महत्वपूर्ण समझा है। पाठ में यह बताया गया है कि योग साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने मन और आत्मा को एक करता है, जिससे वह मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त करता है। योग और प्राचीन भारतीय दर्शन का गहरा संबंध है, और लेखक ने विभिन्न चक्रों और उनके प्रभावों का भी उल्लेख किया है। चक्रों की शुद्धि और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपनी चेतना को उच्च स्तर पर ले जा सकता है। लेखक ने यह भी बताया है कि योग साधना से व्यक्ति को भौतिक और आध्यात्मिक विकास में मदद मिलती है। इसमें विभिन्न तकनीकों, जैसे प्राणायाम और ध्यान, का उपयोग किया गया है। योग विद्या न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है, बल्कि मानसिक और आत्मिक विकास में भी सहायक होती है। इस ग्रंथ में लेखक ने योग विद्या की गहराई को समझाने के लिए प्राचीन ग्रंथों और विचारों का संदर्भ दिया है, जिससे पाठक योग के महत्व को समझ सके। यह पुस्तक योग विद्या के अध्ययन में रुचि रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है।


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