आईने अकबरी | Aaine Akabari

By: रामलाल पाण्डेय - Ramalal Pandey
आईने अकबरी  | Aaine Akabari by


दो शब्द :

"आईने-अकबरी" एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसे अबुलफ़ज़्ल ने लिखा है। यह ग्रंथ सोलहवीं शताब्दी के भारत का जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है। रामलाल पाणडेय ने इस ग्रंथ का हिंदी में अनुवाद किया है, जिससे यह हिंदी साहित्य की समृद्धि में योगदान दे सके। अनुवादक ने इस कार्य में बहुत मेहनत की है, और उन्होंने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और व्यक्तियों के जीवन चरित्र शामिल किए हैं, जिससे पुस्तक का मूल्य बढ़ गया है। इस ग्रंथ के प्रकाशन के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं, जैसे कि प्रति अंक तृतीय मास में प्रकाशित होगा और ग्राहकों को विशेष लाभ मिलेंगे। अबुलफ़ज़्ल की भूमिका में उन्होंने ईश्वर की महिमा का गुणगान किया है और शासक के कार्यों की प्रशंसा की है। उन्होंने बताया है कि सच्चा शासक अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक होता है और जनता के कल्याण के लिए कार्य करता है। शासक का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं होता, बल्कि वह समाज में न्याय और शांति स्थापित करने का प्रयास करता है। इस ग्रंथ में शासक की विशेषताओं, उसके न्याय, और समाज पर उसके प्रभाव का विवरण दिया गया है। यह ग्रंथ उस समय की राजनीति और समाज की गहरी समझ प्रदान करता है और यह दर्शाता है कि कैसे एक कुशल शासक अपने प्रजा के हितों की रक्षा करता है। अंततः, "आईने-अकबरी" न केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, राजनीति और समाज की जटिलताओं को भी उजागर करता है।


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