घेरण्ड संहिता | Gherand Sanhita

By: जगन्नाथ शर्मा - Jagannath Sharma
घेरण्ड संहिता | Gherand Sanhita by


दो शब्द :

इस पाठ में विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक विचारों का वर्णन किया गया है। इसमें आत्मा, शरीर, और जीवन के उद्देश्य पर विचार किया गया है। पाठ के अनुसार, मनुष्य का जीवन केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य आत्मा की उन्नति और ज्ञान प्राप्त करना है। पाठ में यह बताया गया है कि शरीर एक साधन है, जिसका उपयोग आत्मिक विकास के लिए किया जाना चाहिए। आत्मा का ज्ञान और साधना महत्वपूर्ण है। इसके लिए विभिन्न साधनाओं, जैसे ध्यान, योग, और साधना के माध्यम से आत्मा को शुद्ध करना आवश्यक है। इसके अलावा, पाठ में यह भी वर्णित है कि बाहरी जगत की भौतिकता से परे जाकर व्यक्ति को अपने भीतर की गहराइयों में झांकने की आवश्यकता है। आत्मा की शुद्धता और ज्ञान की प्राप्ति के लिए एकाग्रता और साधना आवश्यक है। अंत में, यह कहा गया है कि व्यक्ति को अपने कार्यों और विचारों के प्रति सजग रहना चाहिए, क्योंकि यही उसकी आत्मिक प्रगति का आधार है। साधना और ज्ञान की प्राप्ति से ही व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है।


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