धन्वन्तरि जराव्याधि | Dhanvantri Jaravyadhi

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: डॉ शिवकुमार व्यास - Dr. Shiv Kumar Vyas दाऊदयाल गर्ग - Daudayal Garg
- पृष्ठ : 398
- साइज: 32 MB
- वर्ष: 1951
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दो शब्द :
इस पाठ में "धन्वन्तरि" नामक पत्रिका के प्रकाशन, इसके विशेषांक, और आयुर्वेद चिकित्सा से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई है। पाठ में यह बताया गया है कि आयुर्वेद में वृद्धावस्था से संबंधित रोगों पर साहित्य की कमी है और इस कमी को पूरा करने के लिए "धन्वन्तरि" द्वारा एक विशेष अंक प्रकाशित किया गया है। इसके अलावा, पाठ में "धन्वन्तरि" के प्रकाशन में हुई देरी, पाठकों की शिकायतों, और पत्रिका के संपादकीय कार्यों की जानकारी दी गई है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि आयुर्वेद से संबंधित लघु विशेषांक प्रकाशित किए जाएंगे और पाठकों से अच्छे लेखों के लिए पुरस्कार योजना की घोषणा की गई है। आर्थिक चुनौतियों की बात करते हुए, कागज पर लगाए गए कर के कारण पत्रिका की लागत बढ़ने और इसके प्रभाव पर चर्चा की गई है। अंत में पाठ में पाठकों से पत्रिका के नए ग्राहकों को जोड़ने की अपील की गई है। कुल मिलाकर, यह पाठ आयुर्वेद और "धन्वन्तरि" पत्रिका के महत्व, उसके प्रकाशन की चुनौतियों, और पाठकों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर केंद्रित है।
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