अपनी अपनी बीमारी | Apni Apni Bimari

By: हरिशंकर परसाई - Harishankar Parsai
अपनी अपनी बीमारी | Apni Apni Bimari by


दो शब्द :

इस पाठ "अपनी-अपनी बीमारी" में लेखक हरिशंकर परसाई ने समाज में विभिन्न प्रकार की मानसिक और सामाजिक बीमारियों का वर्णन किया है। वे चंदा मांगने के संदर्भ में एक बातचीत का उल्लेख करते हैं, जहां चंदा देने वाले और मांगने वाले दोनों एक-दूसरे की मानसिक स्थिति को समझते हैं। लेखक इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि कैसे कुछ लोग टैक्स की बीमारी से दुखी हैं, जबकि वे खुद ऐसी किसी बीमारी का अनुभव नहीं कर पाते। लेखक यह बताना चाहते हैं कि हर किसी का अपना दुख होता है, जो उसकी स्थिति और अपेक्षाओं से जुड़ा होता है। वे अपने दुखों की तुलना करते हैं और यह समझने की कोशिश करते हैं कि दूसरों के दुखों को कैसे समझा जाए। उदाहरण के लिए, वे बिजली के बिल की चिंता करते हैं, जबकि अन्य लोग अपने घरों या व्यवसायों की समस्याओं का रोना रोते हैं। इस प्रकार वे यह दर्शाते हैं कि दुख एक व्यक्तिगत अनुभव है और हर व्यक्ति अपने स्तर पर अपने दुख का सामना करता है। इसके साथ, पाठ के दूसरे हिस्से "पुराना खिलाड़ी" में लेखक ने एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताई है, जो समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर चिंतित है। वह हमेशा तनाव में रहता है और समस्याओं का हल खोजने के प्रयास में लगा रहता है। लेखक ने इस पात्र के माध्यम से यह दिखाया है कि कैसे कुछ लोग समाज की समस्याओं को लेकर चिंतित रहते हैं और उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। कुल मिलाकर, यह पाठ समाज में व्याप्त विभिन्न मानसिक और सामाजिक समस्याओं को दर्शाता है, जहां हर व्यक्ति की अपनी खास बीमारी होती है, चाहे वह मानसिक हो या भौतिक। लेखक ने अपने व्यंग्य के माध्यम से इस स्थिति को बखूबी उजागर किया है।


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