तरपुरा रहस्य (जनाना खांडा) | Trpura Rahasya (jnana Khanda)

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy हिंदू - Hinduism
- लेखक: श्री सनातनदेव जी महाराज - Sri Sanatandevji Maharaj
- पृष्ठ : 398
- साइज: 7 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में भारतीय तंत्रशास्त्र और उनके सिद्धांतों का परिचय दिया गया है। तंत्र की विभिन्न पद्धतियों का आधार वेद हैं, और बौद्ध और अन्य धार्मिक सम्प्रदायों के सिद्धांतों में भी वेदों का प्रभाव देखा जा सकता है। तंत्र को तीन मुख्य भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है: शाक्त, वैदिक, और अन्य। तंत्र का मुख्य उद्देश्य साधक को उसकी इच्छाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक विकास में मदद करना है। इसमें विभिन्न प्रकार की साधनाओं का उल्लेख है, जो साधक को मानसिक बाधाओं जैसे डर, संकोच, और शंका को पार करने में सहायता करती हैं। तंत्र को 'आगम' भी कहा जाता है, और इसे विभिन्न ग्रंथों में विस्तार से वर्णित किया गया है। त्रिपुरा रहस्य जैसे ग्रंथों का उल्लेख करते हुए, तंत्र के ज्ञान और साधना की प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें त्रिपुरा देवी की उपासना का महत्व बताया गया है, जो सभी प्रकार की शक्तियों का स्रोत मानी जाती हैं। पाठ में अद्वैत वेदांत और शाक्त दर्शन के बीच के भेद और समानताओं का भी विश्लेषण किया गया है। अद्वैत वेदांत वास्तविकता को एक अद्वितीय तत्व के रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि शाक्त दर्शन में शक्ति और रूप की विविधता पर जोर दिया गया है। इस प्रकार, पाठ में तंत्र के सिद्धांत, साधना की प्रक्रियाएँ, और उनके दार्शनिक पहलुओं का समुचित रूप से विश्लेषण किया गया है, जो भारतीय आध्यात्मिकता की गहराई और विविधता को दर्शाता है।
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