व्यक्तित्व का विकास | Vyaktitva Ka Vikas
- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता
- लेखक: स्वेट मार्डेन - Swett Marden
- पृष्ठ : 126
- साइज: 3 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में व्यक्ति की आंतरिक शक्तियों और उनकी संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। लेखक का कहना है कि मनुष्य, जो ईश्वर की रचना है, में अपार क्षमताएं और शक्तियां हैं, लेकिन कितने लोग इन शक्तियों से परिचित हैं? अधिकांश लोग अपनी क्षमताओं को पहचानने में असफल होते हैं और अपने जीवन की परिस्थितियों को भाग्य का खेल मान लेते हैं। वे समझते हैं कि वे गरीबी और दुख के लिए ही बने हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वे अपनी इच्छाओं और महत्त्वाकांक्षाओं के माध्यम से अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। पुस्तक में यह बताया गया है कि यदि व्यक्ति अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को ऊंचा रखता है और उन पर विश्वास करता है, तो वह उन्हें पूरा करने में सफल हो सकता है। आशावादिता और सकारात्मक सोच को अपनाने पर व्यक्ति न केवल अपने जीवन में संतुलन और स्वास्थ्य पा सकता है, बल्कि सफलता भी हासिल कर सकता है। लेखक ने यह भी कहा है कि निराशावाद और नकारात्मक सोच व्यक्ति की शक्तियों को कमजोर कर देती है। यदि कोई व्यक्ति अपने विचारों को सकारात्मक बनाता है, तो वह अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए सफलता की ओर बढ़ सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपने विचारों को नियंत्रित करे और उन्हें रचनात्मक और सकारात्मक दिशा में ले जाए। आखिर में, पाठ में इस बात पर जोर दिया गया है कि आत्मविश्वास और महत्त्वाकांक्षा के साथ, सही दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है और एक सफल और खुशहाल जीवन जी सकता है।
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