योगेश्वर कृष्ण | Yogeshwar Krishna

- श्रेणी: धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 404
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1931
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दो शब्द :
यह पाठ महाभारत की कथा और इसके प्रमुख पात्रों, विशेषकर युधिष्ठिर और कृष्ण के कार्यों पर केंद्रित है। इसमें जयपुर के खेतड़ी राज्य के राजा श्रोआ् ज्नीवसि का उल्लेख है, जो विद्या और राजनीति में अद्वितीय थे। पाठ में राजा श्रीक्रजीतसिंहजी और रानी सूर्येक्रेवरि के वंश का भी वर्णन है, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के दुखद अंत और उनके योगदान पर प्रकाश डाला गया है। पाठ का मुख्य भाग जरासंध के शासन और यादवों के द्वारिका जाने की कथा पर आधारित है। जरासंध एक शक्तिशाली सम्राट था जिसने कई राज्यों को पराजित किया और वह विभिन्नता को मिटाना चाहता था। इसके विपरीत, युधिष्ठिर का साम्राज्य धर्म और स्वसम्मान पर आधारित था। कृष्ण ने युधिष्ठिर को सहायता प्रदान की, जिससे उन्होंने जरासंध का वध किया और अपने साम्राज्य की स्थापना की। द्रौपदी के स्वयंवर, युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ, और शिशुपाल का विरोध भी पाठ में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ आयोजित किया, जिसमें सभी राजा शामिल हुए, लेकिन शिशुपाल ने असंतोष प्रकट किया। अंततः, जुए के खेल में युधिष्ठिर ने सब कुछ हार दिया, जो महाभारत की मुख्य कहानी की ओर ले जाता है। पाठ का निष्कर्ष यह है कि युधिष्ठिर और कृष्ण की मित्रता और सहयोग ने पांडवों को उनके संकटों से निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कथा न केवल युद्ध और राजनीति की है, बल्कि मानवीय संबंधों और नैतिकता की भी है।
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