आयुर्वेद का इतिहास | Aaurved Ka Itihas

By: भगवती शरण सिंह - Bhagavati Sharan Singh


दो शब्द :

इस पाठ में आयुर्वेद के इतिहास, उसके विकास, और वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई है। ब्रिटिश शासन के दौरान आयुर्वेद की शिक्षा और प्रगति पर कम ध्यान दिया गया, लेकिन स्वतंत्रता के बाद विभिन्न राज्यों में इसके प्रति रुचि और प्रयत्न बढ़े हैं। लेखक ने आयुर्वेद के प्राचीन और मध्यकालीन विकास को समझाने के लिए विभिन्न ग्रंथों और साहित्य का उल्लेख किया है, जैसे वेद, स्मृतियाँ, पुराण, और महाकाव्य। पुस्तक में ऐतिहासिक तथ्यों को संकलित करने के लिए आयुर्वेद से संबंधित विभिन्न स्रोतों और लेखकों का उपयोग किया गया है। इसमें बताया गया है कि आयुर्वेद के पाठ्यक्रम और चिकित्सा पद्धतियों में क्या सुधार किए जाने चाहिए ताकि इस क्षेत्र में प्रगति की जा सके। विशेष रूप से, आधुनिक काल में आयुर्वेद के प्रतिष्ठित वैद्य और डॉक्टरों का योगदान और आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्थिति पर भी चर्चा की गई है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि आयुर्वेद का अध्ययन करने के लिए हमें प्राचीन साहित्य और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का समन्वय करना होगा। अंत में, आशा व्यक्त की गई है कि यह ग्रंथ वर्तमान समय की आवश्यकताओं को पूरा करेगा और आयुर्वेद के अध्ययन में सहायक सिद्ध होगा।


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