जहंं जहंं चरण परे गौतम के | Jahan Jahan Charan Pare Gautam Ke

- श्रेणी: जीवनी / Biography धार्मिक / Religious बौद्ध / Buddhism
- लेखक: तिक न्यात हन्ह - Thich Nhat Hanh
- पृष्ठ : 542
- साइज: 22 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में बुद्ध के जीवन और उनके अनुयायियों के अनुभवों का वर्णन किया गया है। लेखक ने 'हीनयान' और 'महायान' बौद्ध धर्म की परंपराओं के ग्रंथों का अध्ययन किया है ताकि यह दर्शा सके कि महायान के सिद्धांत मूलतः पालि निकायों और चीनी आगमों में पहले से विद्यमान हैं। लेखक का कहना है कि बौद्ध धर्म के मूल तत्वों को समझने के लिए दोनों परंपराओं के ग्रंथों का अध्ययन आवश्यक है। पुस्तक में बुद्ध के चमत्कारों का वर्णन नहीं किया गया, क्योंकि बुद्ध ने अपने शिष्यों को इस बात की सलाह दी थी कि वे ऐसी शक्तियों को प्राप्त करने या प्रदर्शित करने में समय और ऊर्जा व्यर्थ न करें। इसके बजाय, लेखक ने उन संघर्षों और सामाजिक स्थितियों का उल्लेख किया है जिनका सामना बुद्ध ने किया था, जिससे वह साधारण मानव के रूप में सामने आते हैं। पुस्तक की शुरुआत एक युवा भिक्षु स्वास्ति की कहानी से होती है, जो कि एक भैंसों के चरवाहे से भिक्षु बनने की यात्रा पर है। स्वास्ति की भिक्षु समुदाय में शामिल होने की खुशी और उसकी सामाजिक स्थिति के कारण उसके मन में चल रहे संघर्षों का वर्णन किया गया है। वह बुद्ध के शिष्यों के साथ रहकर ध्यान साधना कर रहा है और अपने नए जीवन की चुनौतियों का सामना कर रहा है। स्वास्ति की कहानी से बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के प्रति उसकी निष्ठा और साहस का पता चलता है। इस प्रकार, पाठ बुद्ध की शिक्षाओं, उनके अनुयायियों के अनुभवों और बौद्ध धर्म की मूल अवधारणाओं पर केंद्रित है, जिसमें ध्यान और साधना के महत्व को उजागर किया गया है।
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