देवी पूजा रहस्य देवि महात्यम | Devi Pooja Rahasya Devi Mahatyam

By: स्वामी ज्योतिर्मयानंद - Swami Jyotirmyanand


दो शब्द :

"देवी पूजा रहस्य" पुस्तक का सारांश इस प्रकार है: इस पुस्तक में देवी महात्म्य, जिसे दुर्गासप्तशती भी कहा जाता है, का सार प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ मार्कण्डेय पुराण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें परमेश्वर को मातृरूप में दर्शाया गया है। इसमें आत्मज्ञान की प्राप्ति की यात्रा को रहस्यमय कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। साधकों को देवी की आराधना के द्वारा मार्गदर्शन, शक्ति, और आत्मज्ञान की प्राप्ति में मदद मिलती है। स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने बताया है कि देवी की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ, जैसे दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती, साधकों के भीतर के विकारों को दूर करने और दिव्य गुणों का विकास करने में सहायक होती हैं। देवी की पूजा से साधक अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं। पुस्तक में नवरात्र की पूजा की महत्ता और देवी के विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है। नवरात्रि के दौरान माँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा विशेष महत्व रखती है और इस दौरान साधक आत्मसाक्षात्कार के लिए आवश्यक शक्ति और कृपा प्राप्त करते हैं। स्वामी ज्योतिर्मयानंद ने अपनी लेखनी के माध्यम से इन गूढ़ कथाओं के प्रतीकात्मक अर्थों को उजागर किया है, जिससे पाठक आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। देवी पूजा का यह रहस्य मानवता की नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण है।


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