फिरदौसी | Firdausi

By: नासिरा शर्मा - Nasira Sharma
फिरदौसी | Firdausi by


दो शब्द :

फिरदौसी एक महान कवि हैं, जिनका जन्म 10वीं शताब्दी में ईरान के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने "शाहनामा" नामक महाकाव्य की रचना की, जिसमें 60,000 शेर हैं। यह कृति विश्व भर में प्रसिद्ध है और इसे होमर के "इलियड" और महर्षि वेद व्यास के महाभारत के समान रखा गया है। "शाहनामा" में इंसानियत, श्रेष्ठ जीवन, गुण-अवगुण, और महिला जाति के पक्ष में विचार प्रस्तुत किए गए हैं। फिरदौसी ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने ईरान के इतिहास को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनका लेखन ईरानी संस्कृति और भाषा को जीवित रखने के उद्देश्य से था, विशेष रूप से जब अरबों का प्रभाव बढ़ रहा था। फिरदौसी ने अपने महाकाव्य में ईरान के पहले बादशाह क्यूमस से लेकर सासानी काल के पतन तक की कहानियाँ शामिल की हैं। फिरदौसी के समय में, सुल्तान महमूद ने उन्हें उचित मान-सम्मान नहीं दिया, जिससे फिरदौसी को दुख हुआ। उन्होंने अपने काव्य कार्य को पूरा करने के लिए 30 वर्षों तक मेहनत की। उनकी मृत्यु के बाद, सुल्तान ने उनकी प्रतिभा की सराहना की और उन्हें सम्मान देने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। फिरदौसी की कब्र नीशापुर में है, जो आज ईरानियों और फ़ारसी साहित्य प्रेमियों का एक प्रिय स्थल है। उनके काम ने उन्हें अमर बना दिया है, और वे आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। उनके द्वारा रचित दास्तानें जैसे रुस्तम और सोहराब, सियावुश और सुदाबे, आदि आज भी पढ़ी और गाई जाती हैं। यह महाकाव्य उन्हें एक अद्वितीय स्थान देता है, जिससे वे साहित्य की दुनिया में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बने रहते हैं।


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