मोहन मोहिनी | Mohan Mohinii

- श्रेणी: पत्रकारिता / Journalism
- लेखक: बिंदु जी महाराज - Bindu Ji Maharaj
- पृष्ठ : 155
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1946
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दो शब्द :
इस पाठ में एक भक्त का भावनात्मक संवाद प्रस्तुत किया गया है, जिसमें वह अपने प्रियतम, भगवान श्री कृष्ण (मोहन) के प्रति अपनी गहरी भक्ति और प्रेम व्यक्त करता है। भक्त अपनी व्यथा, तड़प और आस्था के साथ भगवान से संवाद करता है, यह दर्शाते हुए कि वह अपने जीवन में उनके महत्व को कैसे देखता है। भक्त की बातें दर्शाती हैं कि वह अपने प्रेम में इतना गहरा है कि उसे अपने दुख-दर्द को साझा करने के लिए भगवान का ध्यान खींचना पड़ता है। वह प्रार्थना करता है कि भगवान उसकी पुकार सुनें और उसकी स्थिति से अवगत हों। भक्त ने कई धार्मिक संदर्भों और कथाओं का उल्लेख किया है, जैसे प्रहलाद और द्रोपदी की कहानियाँ, जो यह दर्शाती हैं कि भगवान हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। पाठ में भक्त की भावनाओं की गहराई और भगवान के प्रति समर्पण की भावना को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है। वह अपने जीवन के संघर्षों को भगवान की कृपा से हल करने की आकांक्षा करता है और उनके नाम का जप करता है। भक्त की यह पुकार न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि यह सभी भक्तों के लिए एक प्रेरणा भी है कि वे अपने दुखों को भगवान के चरणों में रखकर शांति और सुख प्राप्त कर सकते हैं। भक्ति का यह भाव प्रदर्शित करता है कि कैसे भक्त अपने ईश्वर के साथ एक गहरा संबंध महसूस करता है और अपनी जीवन की समस्याओं में उन्हें सहायता के लिए पुकारता है।
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