परदे के पीछे | Parde ke piche

By: उदय शंकर भट्ट - Uday shankar Bhatt
परदे के पीछे | Parde ke piche by


दो शब्द :

उदयशंकर भट्ट हिंदी साहित्य के एक प्रतिष्ठित कलाकार हैं, जिन्होंने नाटक, कविता, और कथा लेखन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके नाटकों में विविधता है, जिसमें पौराणिक, ऐतिहासिक, सामाजिक, और नीतिपरक नाटक शामिल हैं। उनके नवीन एकांकियों का संकलन "पर्दे के पीछे" में आठ एकांकी शामिल हैं, जो मुख्यत: आधुनिक युवाओं के संबंधों, नारी के आत्म-निर्भरता की भावना, और सामाजिक व्यंग्य पर केंद्रित हैं। भट्ट जी के नाटकों में नारी की अस्वाभाविकता, पुरुषों के प्रति द्वेष, और स्वतंत्रता की धारणा की आलोचना की गई है। वे सामाजिक मूल्यों के गिरते स्तर और भौतिकता के प्रभाव का भी उल्लेख करते हैं। उनके नाटकों में व्यंग्य का प्रयोग होता है, जो न केवल आलोचना करता है, बल्कि समाधान की ओर भी संकेत करता है। "पर्दे के पीछे" और "बाबूजी" जैसे नाटकों में पारिवारिक जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा के पीछे की प्रवंचनाओं का चित्रण किया गया है। भट्ट जी का लेखन अनुभव और चिंतन से परिपूर्ण है, जो प्राचीन और नवीनता के बीच संतुलन बनाता है। उनका व्यंग्य न केवल नकारात्मक है, बल्कि रचनात्मक भी है, जो सहानुभूति के साथ समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। इस प्रकार, भट्ट जी का कार्य हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, और उनके नाटक आज के समाज की जटिलताओं और समस्याओं को उजागर करते हैं।


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