कर्मभूमि | Karmabhoomi

By: प्रेमचंद - Premchand
कर्मभूमि | Karmabhoomi by


दो शब्द :

"कर्मभूमि" उपन्यास के प्रारंभ में लेखक प्रेमचंद ने स्पष्ट किया है कि पात्र और स्थान काल्पनिक हैं, जिससे पाठक यह न समझें कि ये किसी ऐतिहासिक व्यक्ति या स्थान से जुड़े हुए हैं। उपन्यास का आधार शिक्षालयों में फीस वसूली की कठोरता और उसके परिणामों पर है। कहानी की मुख्यधारा में अमरकान्त नामक एक छात्र है, जो अपनी फीस के लिए चिंतित है। उसकी मित्रता सलीम नामक एक लड़के से है, जो उसकी सहायता करता है। फीस जमा करने के दिन, अमरकान्त की आँखों में आँसू होते हैं और वह सलीम से मदद मांगता है। सलीम उसे तसल्ली देता है और अपनी फीस देने के लिए प्रेरित करता है। अमरकान्त के पिता, लाला समरकान्त, एक उद्योगपति हैं जिन्होंने कठिन परिश्रम से संपत्ति बनाई है। लेकिन अमरकान्त और उसके पिता के बीच भावनात्मक दूरी है। अमरकान्त की मां का निधन हो चुका है और उसके पिता ने दोबारा शादी कर ली है, जिससे अमरकान्त को अपनी नई मां से भी कठिनाई होती है। कहानी में शिक्षालय की फीस वसूली की सख्ती और उसके कारण गरीब छात्रों की स्थिति को दर्शाया गया है। अमरकान्त की संघर्ष कहानी समाज में व्याप्त आर्थिक विषमताओं और शिक्षा प्रणाली की विफलताओं को उजागर करती है। इस प्रकार, "कर्मभूमि" एक सामाजिक उपन्यास है जो शिक्षा, गरीबों की समस्याओं, और पारिवारिक संबंधों के बीच संतुलन की तलाश करता है।


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