अतीत के चलचित्र | Ateet Ke Chalchitra

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel साहित्य / Literature
- लेखक: महादेवी वर्मा - Mahadevi Verma
- पृष्ठ : 226
- साइज: 16 MB
- वर्ष: 1941
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दो शब्द :
महादेवी वर्मो के इस पाठ में अतीत की यादों और संवेदनाओं का विवरण है। लेखिका उन व्यक्तियों और घटनाओं का उल्लेख करती हैं जिन्होंने उनके जीवन को प्रभावित किया। वह एक वृद्ध सेवक की कहानी का उल्लेख करती हैं, जिसे उसके स्वामी ने तुच्छ कारणों से दंडित किया। यह वृद्ध व्यक्ति अपने छोटे-छोटे उपहारों के साथ बच्चों की प्रतीक्षा में पुल पर बैठा रहता, लेकिन उसकी आँखों में गहरी उदासी होती थी। लेखिका अपने अतीत की छवियों को जीवित रखने के लिए प्रेरित होती हैं और अपने संस्मरणों को साझा करने का निर्णय लेती हैं। उनका उद्देश्य यह है कि भविष्य में जब समय इन यादों को धुंधला कर दे, तब इन संस्मरणों के माध्यम से वह अतीत को फिर से पहचान सकें। महादेवी वर्मो यह भी कहती हैं कि इन संस्मरणों का प्रकाशन कभी उनकी प्राथमिकता नहीं रहा, क्योंकि ये उनके जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं। वह चाहती हैं कि ये संस्मरण केवल मनोरंजन का साधन न बनें, बल्कि पाठकों को उन अनुभवों से जोड़ें जो जीवन की गहराइयों को दर्शाते हैं। पाठ का एक अन्य हिस्सा एक अनाथ लड़की की दयनीय स्थिति का वर्णन करता है। यह लड़की अनाथालय में रह रही थी और उसके पास न तो परिवार था, न ही कोई पहचान। उसकी माँ की स्थिति भी अत्यंत दयनीय थी, और उसके जीवन की कठिनाइयाँ लेखिका को गहरे संवेदनशील बनाती हैं। वह सोचती हैं कि समाज की विकृतियों के कारण कितनी स्त्रियाँ अपने मातृत्व और गरिमा को खो देती हैं। महादेवी वर्मो का यह पाठ अतीत की करुणा, संवेदनशीलता और समाज की वास्तविकताओं को उजागर करता है, जिसमें वे अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से पाठक को गहराई से छूने का प्रयास करती हैं।
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