भारत में अंग्रेजी राज | Bharat Mein Angrezi Raj

- श्रेणी: Freedom and Politics | आज़ादी और राजनीति इतिहास / History भारत / India
- लेखक: सुन्दरलाल - Sundarlal
- पृष्ठ : 727
- साइज: 36 MB
- वर्ष: 1929
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दो शब्द :
इस पाठ में "भारत में अंगरेज़ी राज" नामक पुस्तक का परिचय और उसकी प्रकाशन प्रक्रिया का विवरण दिया गया है। लेखक सुन्दरलाल ने इस पुस्तक को 1626 में पहली बार प्रकाशित किया, जिसके बाद इसे सरकारी आदेश से जब्त कर लिया गया। इसके बावजूद, कुछ प्रतियाँ ग्राहकों तक पहुँच गईं, जिससे देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। महात्मा गांधी ने इसे "दिन दहाड़े डाका" बताया और लोगों को सलाह दी कि वे अपनी प्रतियाँ न दें। पुस्तक का दूसरा संस्करण 1638 में प्रकाशित किया गया, जिसमें पहले संस्करण की तुलना में कुछ सुधार किए गए थे। लेखक ने कई प्रामाणिक स्रोतों से जानकारी संकलित की है, और पुस्तक में चित्रों और नक्शों की संख्या बढ़ाई गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य भारत में अंगरेज़ी राज के प्रभाव को समझाना और पाठकों को देश की ऐतिहासिक स्थिति से अवगत कराना है। लेखक ने अपने काम में कई विद्वानों और मित्रों का सहयोग लिया, और पुस्तक के विभिन्न अध्यायों में भारतीय इतिहास, संस्कृति और अंगरेज़ों के आक्रमण पर प्रकाश डाला गया है। लेखक का विश्वास है कि यह पुस्तक पाठकों को भारत की स्थिति और उसके सुधार की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करेगी।
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