दशरूपकम् | Dashroopkam

- श्रेणी: साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: श्री निवासजी जैन शास्त्री - Shri Nivasji Jain Shastri
- पृष्ठ : 436
- साइज: 10 MB
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह पाठ 'दशरूपकम्' नामक नाट्यशास्त्र पर आधारित है, जिसमें विभिन्न नाटकीय तत्वों का वर्णन किया गया है। इसमें पात्रों के बीच संवाद, भावनाओं का प्रदर्शन और काव्यशास्त्र के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख है। पाठ में वीज, जो कि एक प्रकार का फूल है, का उपमाएँ दी गई हैं, और यह दर्शाया गया है कि कैसे यह फूल अपने चारों ओर के वातावरण को प्रभावित करता है। इसमें नायक उदयन और नायिका सागरिका के बीच प्रेम और आकर्षण का वर्णन है। पाठ में यह भी बताया गया है कि कैसे नायक और नायिका एक दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं, और कैसे उनके बीच की दूरी को प्रेम और आकर्षण के माध्यम से मिटाया जाता है। विभिन्न प्रकार के भावों का वर्णन करते हुए, पाठ में यह भी दर्शाया गया है कि पात्रों के मध्य संवाद कैसे गहराई और सजीवता लाता है। पाठ में नाटक के दौरान होने वाली विभिन्न घटनाओं और पात्रों के विकास का भी उल्लेख है। कुल मिलाकर, यह पाठ नाटकीयता, प्रेम, आकर्षण और संवाद के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त करने की कला का एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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