योग शिक्षा | Yoga Shiksha

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता योग / Yoga शिक्षा / Education साहित्य / Literature
- लेखक: रजनी गौतम - Rajni Gautam
- पृष्ठ : 147
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 2001
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दो शब्द :
यह पाठ योग शिक्षा पर केंद्रित है, जिसमें योग के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है। योग का मूल अर्थ "जोड़ना" है, और यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। स्वामी विवेकानंद और महर्षि पतंजलि जैसे योगी इसे आत्मा और परमात्मा के मिलन की प्रक्रिया मानते हैं। पाठ में योग के आठ अंगों का उल्लेख किया गया है, जो हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, और समाधि। यम में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह शामिल हैं। नियम में शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान शामिल हैं। आसन का अर्थ है स्थिरता से बैठना, जबकि प्राणायाम का अर्थ है प्राणों का नियंत्रण। अन्य अंगों में इंद्रियों का नियंत्रण (प्रत्याहार), मन की एकाग्रता (धारणा), और ध्यान की गहनता (ध्यान) शामिल है। समाधि ध्यान की उच्चतम अवस्था है। योगासन का महत्व भी बताया गया है, जिसमें शरीर को स्वस्थ और लचीला बनाए रखने के साथ-साथ रोगों से बचाव की क्षमता भी शामिल है। योगासन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यह एक ऐसा अभ्यास है जिसे सभी उम्र के लोग कर सकते हैं, और इसे किसी विशेष स्थान या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है। योग का अभ्यास शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
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