भातखण्डे संगीत शास्त्र | Bhatkhande Sangeet Sastra

- श्रेणी: संगीत / Music
- लेखक: विष्णुनारायण - Vishnunarayan
- पृष्ठ : 336
- साइज: 14 MB
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: लेखक श्री विष्णुनारायण भातखंडे द्वारा रचित "हिन्दुस्थानी संगीत पद्धति" का यह तीसरा भाग संगीत के अध्ययन और उसके विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है। यह पुस्तक संगीत के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ है, जो पिछले 40 वर्षों से हिन्दी में संगीत शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रही है। संपादक लचमीनारायण ने मराठी से हिन्दी में अनुवाद किया है, जिससे यह सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए उपलब्ध हो सकी है। इस प्रलेख में संगीत की गहराई, उसकी शाखाएँ, और विभिन्न रागों का विस्तार से वर्णन किया गया है। रागों के स्वर, उनके प्रकार, और उनके बीच के संबंधों की चर्चा की गई है। विशेष रूप से, आलाप, राग का विस्तार, और रागों की तुलना के माध्यम से संगीत की कला की बारीकियों को समझाने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक के माध्यम से संगीत के प्रति नई चेतना, उल्लास और प्रेरणा का संचार होता है। इसमें संगीत की परंपरा, उसके विकास, और सांस्कृतिक महत्व पर जोर दिया गया है। अंत में, लेखक ने पाठकों से आग्रह किया है कि वे इस ग्रंथ का गंभीरता से अध्ययन करें ताकि वे इसकी गहराई और सौंदर्य का आनंद ले सकें। इस प्रकार, यह पाठ संगीत कला का एक समृद्ध और विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है, जो भारतीय संगीत की परंपरा और सिद्धांत को समझने में मदद करता है।
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