अभिनव प्राकृतिक चिकित्सा भाग १ | Abhinav Prakritik Chikitsa part 1

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद रोग / disease साहित्य / Literature
- लेखक: कुलरंजन मुखार्जी - Kulranjan Mukhaarji
- पृष्ठ : 316
- साइज: 6 MB
- वर्ष: 1942
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दो शब्द :
इस पाठ में प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व और इसके उपयोग के बारे में चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि प्राकृतिक चिकित्सा का अर्थ है कि रोगों का उपचार प्राकृतिक तत्वों जैसे जल, वायु, मिट्टी आदि के माध्यम से किया जाए। यह चिकित्सा पद्धति विशेष रूप से गरीब लोगों के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसमें अधिक खर्च नहीं होता और इसे आसानी से अपनाया जा सकता है। महात्मा गांधी के दृष्टिकोण को भी पाठ में शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ जीवन जीने की आवश्यकता पर जोर दिया है। गांधीजी का मानना था कि बीमारी को ठीक करने के लिए ऐसी चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग करना चाहिए, जो न केवल रोग को ठीक करें, बल्कि भविष्य में बीमारियों से भी बचाए। पाठ में यह भी बताया गया है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं अक्सर शरीर की प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देती हैं और रोग का स्थायी समाधान नहीं करतीं। इसके बजाय, प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर की स्वाभाविक चिकित्सा शक्ति को जागृत कर सकता है। लेखक ने यह सुझाव दिया है कि लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना चाहिए और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए, जिससे वे न केवल अपनी बीमारियों से छुटकारा पा सकें, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली भी अपना सकें। इस प्रकार, पाठ हमें यह सिखाता है कि स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक तरीके अपनाना अधिक लाभदायक है और हमें अपने शरीर की नब्ज को समझकर ही उसके अनुसार उपचार करना चाहिए।
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