भोज- प्रबंध | Bhoja- Prabandha

By: देवर्षि सनाढ्य - Devrshi Sanadhaya
भोज-  प्रबंध | Bhoja- Prabandha by


दो शब्द :

इस पाठ में राजा भोज की कहानी का वर्णन किया गया है। राजा भोज का जन्म एक महान राजा के रूप में हुआ था, जिनके पिता का नाम सिन्धुल था। भोज के पांच साल की उम्र में उनके पिता ने अपने छोटे भाई मुंज को राज्य सौंपने का निर्णय लिया। राजा ने यह सोचकर कि अपने छोटे पुत्र भोज को राज्य देना उचित नहीं होगा, मुंज को राज्य की बागडोर सौंपी। पाठ में यह भी बताया गया है कि कैसे राजा भोज ने शिक्षा प्राप्त की और विभिन्न विद्याओं में निपुण हो गए। एक दिन एक ज्ञानी ब्राह्मण राजा भोज के पास आया और उसने राजा को बताया कि विद्या के बिना व्यक्ति का ज्ञान अधूरा होता है। राजा भोज ने ब्राह्मण से विद्या की महत्ता के बारे में ज्ञान प्राप्त किया और अपने पिता के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए विद्या की ओर अग्रसर हुए। राजा भोज की कहानी में लोभ, क्रोध और द्रोह जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई है। लोभ को पाप का मूल कारण बताया गया है और यह दर्शाया गया है कि कैसे लोभ मनुष्य को अपने प्रियजनों के प्रति भी क्रूर बना सकता है। पाठ में आगे राजा भोज के भाग्य और उनके भविष्य की भी चर्चा की गई है, जिसमें उनके सौंदर्य और गुणों की प्रशंसा की गई है। अंत में, राजा भोज की विद्या और उसके प्रभाव पर जोर दिया गया है, यह दर्शाते हुए कि विद्या ही वास्तविक शक्ति है जो व्यक्ति को महान बनाती है।


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