हिंदी नाटक - कोश | Hindi Natak - Kosh

By: दशरथ ओझा - Dashrath Ojha
हिंदी नाटक - कोश | Hindi Natak - Kosh by


दो शब्द :

इस पाठ में हिंदी नाटक के विकास और संरक्षण के महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक ने बताया है कि हिंदी नाटक की प्राचीन संपदा धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है और इसे संरक्षित करना एक राष्ट्रीय धर्म है। उन्होंने इस विचार को साझा किया कि हिंदी नाटकों का एक संकलन होना चाहिए, जिसमें सभी नाटकों का परिचय और विवरण उपलब्ध हो सके। लेखक ने यह स्वीकार किया है कि कई नाटक ऐतिहासिक पुस्तकालयों में गुम हो चुके हैं और उनकी रचनाएँ दयनीय स्थिति में हैं। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि कैसे उन्होंने विभिन्न स्थानों पर यात्रा की और प्राचीन नाटकों की खोज की। इस प्रक्रिया में उन्हें कई महत्वपूर्ण सामग्री मिली, जिससे उन्हें अपने कार्य के प्रति उत्साह मिला। लेखक ने यह भी उल्लेख किया कि हिंदी नाटक केवल उत्तर भारत में ही नहीं, बल्कि नेपाल, असम और तंजोर जैसे क्षेत्रों में भी लिखे गए हैं। उन्होंने विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच नाट्य साहित्य के विकास का उल्लेख किया और यह भी कहा कि प्राचीन नाटकों में समाज की समस्याओं और मानवीय मूल्यों को दर्शाने का प्रयास किया गया था। अंत में, लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला कि प्राचीन नाटकों में निहित व्यक्तिगत अनुभव और सामूहिक भावनाएँ आज भी महत्वपूर्ण हैं, और इनकी खोज एवं संरक्षण आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इन्हें समझ सकें और इन्हें अपने सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संजो सकें।


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