चिकित्सा-चंद्रोदय पाँचवाँ भाग | Chikitsa-chandroday Vol - 5

By: बाबू हरिदास वैध - Babu Haridas Vaidhya


दो शब्द :

इस पाठ में लेखक बाबू हरिदास वेद ने अपने ग्रंथ "चिकित्सा-चन्द्रोदय" के विभिन्न भागों के प्रकाशन के बारे में विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई है कि उनके लिखे हुए ग्रंथों को हिंदी-भाषी समुदाय में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। वे बताते हैं कि इस ग्रंथ के कई भागों के नए संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं और उन्होंने इसे स्वास्थ्य रक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि वे अपने छोटे उत्तराधिकारी, राजेन्द्रकुमार की बीमारी के कारण अपने कार्य में पूर्णता नहीं ला सके। उन्होंने पाठकों से अपील की है कि वे उनके छोटे उत्तराधिकारी को प्रोत्साहित करें। इसके बाद, लेखक ने चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं, जैसे स्थावर और जंगम विष-चिकित्सा पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें उन्हें जनता की मांग के अनुसार लिखा गया है। लेखक ने यह उल्लेख किया है कि उन्होंने विष से संबंधित विभिन्न जानवरों के काटने का उपचार, महिलाओं के रोगों, गर्भधारण, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के निदान और उपचार के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्होंने पाठकों की सुविधा के लिए कई जानकारियों को विस्तार से लिखा है, जिससे लोग आसानी से उपचार कर सकें। लेखक ने अपनी किताब में कुछ दोषों का भी स्वीकार किया है और पाठकों से उनके प्रति दया की अपील की है, यह बताते हुए कि उनका उद्देश्य केवल जनहित में काम करना है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार का लाभ कमाने का इरादा नहीं है, बल्कि वे आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार करना चाहते हैं। अंत में, उन्होंने पाठकों से धैर्य रखने की अपील की है और आगे आने वाले भागों में और भी महत्वपूर्ण चिकित्सा जानकारी देने का आश्वासन दिया है।


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