चिकित्सा-चंद्रोदय (दूसरा भाग) | Chikitsa-chandroday Part - 2

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: बाबू हरिदास वैध - Babu Haridas Vaidhya
- पृष्ठ : 680
- साइज: 24 MB
- वर्ष: 1934
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दो शब्द :
इस पाठ में लेखक हरिदास वेद्य ने अपने लेखन कार्य और अपनी पुस्तकों, विशेषकर "स्वास्थ्यरक्षा" और "चिकित्सा-चन्द्रोदय" की लोकप्रियता के बारे में चर्चा की है। उन्होंने बताया कि इन पुस्तकों के कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं और पाठकों के बीच इनकी भारी मांग है। लेखक ने अपनी सफलता का श्रेय भगवान श्रीकृष्ण की कृपा को दिया और कहा कि उनकी पुस्तकों की बिक्री में पाठकों का विशेष योगदान है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया कि पाठक बार-बार उनसे नवीनतम संस्करणों के बारे में पूछते हैं, और उन्होंने अपने स्वास्थ्य के कारण लिखने में कठिनाई का सामना किया है। वह अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए लिखाई में ब्रेक लेने का निर्णय लेते हैं। अंत में, उन्होंने अपने पाठकों के प्रति आभार व्यक्त किया और आशा जताई कि वह जल्द ही फिर से लिखना शुरू करेंगे। इस प्रकार, पाठ में लेखक की साहित्यिक यात्रा, उनके स्वास्थ्य के मुद्दे और पाठकों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाया गया है।
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