हिंदी ऋग्वेद | Hindi Rigved

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता धार्मिक / Religious वेद /ved
- लेखक: रामगोविन्द त्रिवेदी वेदंतशास्त्री - Ramgovind Trivedi Vedantshastri
- पृष्ठ : 1622
- साइज: 133 MB
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में वेदों की नित्यता और उनके स्वरूप पर चर्चा की गई है। वेदों को अद्वितीय और शाश्वत माना गया है, जिन्हें ऋषियों ने ईश्वर की प्रेरणा से प्राप्त किया। पाठ में बताया गया है कि वेद शब्द का अर्थ 'ज्ञान' है और इसे नित्य समझा जाता है। ऋषियों ने अपने अंतःकरण में जो अनुभव किया, वह वेदों के रूप में प्रकट हुआ। वेदों के प्रति विभिन्न दार्शनिक दृष्टिकोणों को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि कुछ विचारक वेदों को अपौरुषेय मानते हैं, जबकि अन्य उन्हें ऐतिहासिक मानते हैं। पाठ में यह भी उल्लेख है कि वेदों का ज्ञान न केवल भूतकाल के लिए, बल्कि भविष्य और वर्तमान के लिए भी है। इसके अलावा, शंकराचार्य और अन्य विद्वानों के विचारों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने वेदों की नित्यता को प्रमाणित किया है। पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि शब्द और ध्वनि की प्रकृति नित्य है और वेदों का ज्ञान निरंतरता का प्रतीक है। अंत में, यह कहा गया है कि वेदों का ज्ञान मानवता के कल्याण के लिए असीम है और यह सत्य से जुड़ा हुआ है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.