भरत और उनका नाट्य शास्त्र | Bharat Aur Unka Natya Shastra

By: ब्रजबल्लभ मिश्र - Brajballabh Mishr
भरत और उनका नाट्य शास्त्र | Bharat Aur Unka Natya Shastra by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश यह है कि यह "भरत और उनका नाट्यशास्त्र" पुस्तक है, जिसे डॉ. ब्रज बल्लभ मिश्र ने लिखा है। यह पुस्तक भारतीय संस्कृति और नाट्यशास्त्र की गहराई में प्रवेश करने का प्रयास करती है, जो कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेखक ने नाट्यशास्त्र के 37 अध्यायों का अध्ययन किया है और इस विषय से जुड़ी भ्रांतियों का समाधान प्रस्तुत किया है। पुस्तक का उद्देश्य नाट्यशास्त्र को न केवल विद्वानों, बल्कि रंगकर्मियों के लिए भी उपयोगी बनाना है। नाट्यशास्त्र को एक अमूल्य ग्रंथ माना गया है, जिसमें काव्य, कला, अभिनय, रस, और भावों का विस्तृत वर्णन है। लेखक ने यह भी बताया है कि नाट्यशास्त्र का अध्ययन कठिन है, क्योंकि यह संस्कृत में लिखा गया है और इसमें कई पारिभाषिक शब्द हैं, जिनके सही अर्थ समझने के लिए गहरी समझ की आवश्यकता है। पुस्तक का प्रकाशन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो भारतीय नाट्य कला को समझने में रुचि रखते हैं, क्योंकि नाट्यशास्त्र की जानकारी आजकल के बौद्धिक विमर्श का हिस्सा बन गई है, जबकि इसे अध्ययन का साधन नहीं माना जाता। इसके अलावा, पुस्तक की भूमिका में डॉ. रामकुमार वर्मा ने डॉ. मिश्र की साहित्यिक और कलात्मक प्रतिभा की सराहना की है और आशा व्यक्त की है कि यह पुस्तक नाट्यशास्त्र के अध्ययन में सहायक होगी। इस प्रकार, यह पुस्तक नाट्यशास्त्र की गहराई, उसकी महत्वता और उसकी व्याख्या पर केंद्रित है, ताकि इसे समझने में सहूलियत हो सके और भारतीय नाट्य कला के प्रति जागरूकता बढ़ सके।


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