विनय-पत्रिका ( हरितोषिणी टीका) | Vinay - Patrika ( Haritoshini tika )

By: गोस्वामी तुलसीदास - Goswami Tulsidas
विनय-पत्रिका ( हरितोषिणी टीका)  | Vinay - Patrika ( Haritoshini tika ) by


दो शब्द :

इस पाठ में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित "विनय-पत्रिका" का महत्व और विशेषताएँ वर्णित की गई हैं। यह ग्रंथ भक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है और तुलसीदास की काव्य प्रतिभा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। प्रकाशक गोपालदास सेवक इस काव्य के महत्व को बताते हैं और इसे पाठकों के लिए प्रस्तुत करते हैं। पाठ में बताया गया है कि "विनय-पत्रिका" में प्रेम, भक्ति, और अपने दीनता का भाव प्रमुख है, जो पाठकों के मन में पवित्रता और आनंद का संचार करता है। इसे तुलसीदास की अन्य कृतियों के साथ-साथ रामचरितमानस की तरह महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अलावा, इस ग्रंथ की टीका को भी सराहा गया है और इसे पहले के संस्करणों में जो सुधार किए गए हैं, उनके बारे में जानकारी दी गई है। प्रकाशक ने यह भी उल्लेख किया है कि इस ग्रंथ को विभिन्न विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, जिससे इसका व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। पाठ में भक्ति के तत्वों, जैसे कि प्रेम, श्रद्धा, और आत्म-समर्पण की चर्चा की गई है, और यह बताया गया है कि तुलसीदास की भक्ति अन्य भक्ति परंपराओं से अलग है। सारांश के रूप में, "विनय-पत्रिका" को भक्ति साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, और इसके माध्यम से भक्त के हृदय में प्रभु के प्रति अद्भुत श्रद्धा और प्रेम की अनुभूति होती है। यह ग्रंथ पाठकों को आत्मिक संतोष और दिव्यता की ओर अग्रसर करता है।


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