हिंदी संख्या दर्शन | Hindi Sankhya Darshan

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy संस्कृत /sanskrit साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: पण्डित सीताराम शास्त्री - Pandit Sitaram Shastri
- पृष्ठ : 81
- साइज: 14 MB
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: सांख्य दर्शन का विकास कपिल नामक एक सिद्ध पुरुष से हुआ, जो भगवान के 24 अवतारों में से एक माने जाते हैं। कपिल ने सांख्य शास्त्र की स्थापना की, जिसमें सत्वों और आसुरी गुणों का विवेचन किया गया है। इस शास्त्र का उद्देश्य आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन करना है। कपिल की शिक्षाएं प्राचीन थीं, और उनके शिष्य आसुरि ने इन्हें विस्तार से समझाया। सांख्य शास्त्र के अनुसार, यह सृष्टि 24 तत्वों से मिलकर बनी है, जिनमें प्रकृति और पुरुष का महत्वपूर्ण स्थान है। सांख्य शास्त्र में तत्वों की स्थापना की गई है, जैसे कि प्रकृति, पुरुष, बुद्धि, अहंकार, इंद्रिय आदि। यह शास्त्र जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे ज्ञान, अनुभव और कर्म के संबंध में गहनता से विचार करता है। इसके तत्वों का वर्गीकरण किया गया है, जिसमें पांच महाभूत, इंद्रिय, और अंतःकरण के विभिन्न घटक शामिल हैं। इस दर्शन में यह भी बताया गया है कि काल और भगवान के बीच संबंध क्या है, और कैसे काल की धारणा से भौतिक जगत का निर्माण होता है। भक्तिभाव और ज्ञान की एकता पर जोर दिया गया है, जिससे व्यक्ति आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझ सके और मोक्ष की ओर बढ़ सके। इस प्रकार, सांख्य दर्शन न केवल तत्वों का विवेचन करता है, बल्कि जीवन की गहरी समझ और आत्मा के वास्तविक स्वरूप की पहचान के लिए एक मार्ग प्रशस्त करता है।
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