समाधि तंत्र ( सटीक) | Samadhi tantra (satik)

- श्रेणी: Magic and Tantra mantra | जादू और तंत्र मंत्र ग्रन्थ / granth ज्योतिष / Astrology
- लेखक: आचार्य जुगल किशोर जैन 'मुख़्तार' - Acharya Jugal Kishor Jain 'Mukhtar'
- पृष्ठ : 148
- साइज: 6 MB
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दो शब्द :
"समाधितंत्र" एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ है, जिसे श्रीपृज्यपादाचार्य ने लिखा। इस ग्रंथ का उद्देश्य आत्मा की शुद्धता और ज्ञान की प्राप्ति के मार्ग को स्पष्ट करना है। यह ग्रंथ आचार्य की अंतिम रचनाओं में से एक है, जिसमें उन्होंने बाह्य विषयों से हटकर अंतर्मुखी साधना पर ध्यान केंद्रित किया है। समाधितंत्र में 105 पद्म हैं, जिनमें से हर एक पद आत्मा की विभिन्न अवस्थाओं को दर्शाता है। ग्रंथ का प्रारंभ भक्ति और ध्यान के महत्व पर होता है, और यह पाठक को आत्मा की शुद्धता की ओर प्रेरित करता है। इसमें ज्ञान, साधना और आत्मा की वास्तविकता के बारे में गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं। ग्रंथ की विशेषता यह है कि इसमें जटिल विचारों को सरल और सटीक शब्दों में प्रस्तुत किया गया है, जिससे पाठक को इसे पढ़ने में आसानी होती है। ग्रंथ में आत्मा की पहचान और उसकी शुद्धता को समझने के लिए विभिन्न आचार्यों के विचारों का संदर्भ दिया गया है। उदाहरण के लिए, कुन्दकुन्द आचार्य के उद्धरणों के माध्यम से आत्मा की वास्तविकता को स्पष्ट किया गया है। समाधितंत्र का अध्ययन करने से पाठक का मन शांति और ज्ञान की ओर अग्रसर होता है, और यह ग्रंथ आत्मा की गहरी समझ प्रदान करता है। इस प्रकार, "समाधितंत्र" एक श्रेष्ट आध्यात्मिक ग्रंथ है, जो साधक को आत्मज्ञान की ओर ले जाने में सहायक हो सकता है।
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