इतिहास दर्शन | Itihas Darshan

- श्रेणी: इतिहास / History दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy
- लेखक: बुद्ध प्रकाश - Buddh Prakash
- पृष्ठ : 417
- साइज: 27 MB
- वर्ष: 1962
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दो शब्द :
इस पाठ में इतिहास-दर्शन के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक ने बताया है कि इतिहास लेखन में विभिन्न दृष्टिकोणों का महत्व होता है, जिसमें घटनाएँ और तथ्य एक समान होते हुए भी इतिहासकार अपनी-अपनी व्याख्या के आधार पर भिन्नता दिखाते हैं। कुछ इतिहासकार घटनाओं को केवल उसी रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं, जिसमें वे घटित हुईं, जबकि अन्य सांस्कृतिक, सामाजिक, या भौगोलिक दृष्टिकोणों से उनका विश्लेषण करते हैं। डॉ. बुद्ध प्रकाश ने पचासों प्रसिद्ध इतिहासकारों के विचारों का परिचय देते हुए दर्शाया है कि विभिन्न युगों में समाज का इतिहास-दर्शन कैसा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इतिहास का अध्ययन केवल घटनाओं के संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवता के अतीत के अनुसंधान के माध्यम से व्यापक प्रवृत्तियों का अध्ययन भी शामिल है। प्रस्तावना में इतिहास-दर्शन की परिभाषा दी गई है और बताया गया है कि यह एक आलोचनात्मक या वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। 18वीं शताब्दी में वोल्तेयर द्वारा इसका प्रयोग किया गया था और इसके बाद के लेखकों ने इसे विवेचनात्मक दृष्टिकोण में शामिल किया। प्राच्य इतिहास-दर्शन के संदर्भ में, लेखक ने प्राचीन शाम की संस्कृति का उल्लेख किया, जहां धार्मिक परंपरा के कारण अतीत के प्रति जागरूकता थी। प्राचीन साम में देवताओं और मनुष्यों के बीच के संबंधों को समझने के लिए इतिहास का ज्ञान आवश्यक माना जाता था। इस प्रकार, पाठ में इतिहास-दर्शन के विभिन्न आयामों, दृष्टिकोणों और प्राचीन संस्कृतियों की विशेषताओं की जानकारी दी गई है, जो इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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