हिंदी साहित्य: उदभव और विकास | Hindi Sahitya : Udbhav aur Vikash

- श्रेणी: भक्ति/ bhakti साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: हजारी प्रसाद द्विवेदी - Hazari Prasad Dwivedi
- पृष्ठ : 260
- साइज: 28 MB
- वर्ष: 1952
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दो शब्द :
इस पाठ में हिंदी साहित्य के उद्भव और विकास का संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक आचार्य द्विवेदी द्वारा लिखी गई है और इसे उनके मूल रूप में प्रकाशित किया गया है, ताकि उनके विशेष दृष्टिकोण को बनाए रखा जा सके। हिंदी साहित्य का इतिहास कई कालखंडों में विभाजित है, जिसमें आदिकाल, भक्ति साहित्य, निर्गुण-भक्ति, कृष्णभक्ति, रामभक्ति, प्रेम-कथानक, रीतिकाव्य और आधुनिक काल शामिल हैं। हिंदी साहित्य का आदिकाल प्रामाणिक रचनाओं के अभाव से ग्रस्त है, लेकिन इस काल की रचनाएँ जैसे खुमानरासो, विजयपालरासो और पृथ्वीराजरासो महत्वपूर्ण हैं। भक्ति साहित्य में अवतारवाद और भक्तिमार्ग का योगदान है, जिसमें प्रमुख संतों की रचनाएँ शामिल हैं। निर्गुण-भक्ति में कबीर और अन्य संतों का साहित्य महत्वपूर्ण है, जबकि कृष्णभक्ति में सूरदास और मीराबाई जैसे कवियों की रचनाएँ प्रमुखता रखती हैं। रीतिकाव्य में शृंगार और भावना का विशेष महत्व है, जिसमें बिहारीलाल और अन्य कवियों का योगदान महत्वपूर्ण है। आधुनिक काल में गद्य साहित्य का विकास हुआ, जिसमें भारतेंदु हरिश्चंद्र का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह पुस्तक हिंदी साहित्य के विभिन्न पहलुओं और प्रवृत्तियों को संक्षिप्त और सुबोध भाषा में प्रस्तुत करती है, ताकि विद्यार्थी अद्यावधिक शोध कार्यों से अवगत रह सकें। इसके साथ ही, यह पुस्तक साहित्य की विभिन्न धाराओं के विकास को भी रेखांकित करती है।
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