गांवों में औषधरत्न (तृतीय खंड) | Ganvon Me Aushadhratna Vol.-3
- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: स्वामी महाराज - Swami Maharaj
- पृष्ठ : 536
- साइज: 23 MB
- वर्ष: 1930
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दो शब्द :
इस पाठ में आयुर्वेदिक औषधियों की उपयोगिता और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों के बढ़ते आकर्षण का वर्णन किया गया है। इसमें यह चिंता व्यक्त की गई है कि कैसे लोग पारंपरिक उपचारों को भूलकर विदेशी दवाओं और इंजेक्शनों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान और रोग निवारण की क्षमता कमजोर हो रही है। लेखक ने यह भी बताया कि अज्ञानता के कारण लोग अस्थाई उपचारों का सहारा लेते हैं, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके साथ ही, पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई प्रभावी औषधियाँ प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं, जिन्हें सही जानकारी और समझ के साथ उपयोग में लाया जा सकता है। पाठ में यह भी सुझाव दिया गया है कि स्थानीय वन औषधियों का उपयोग करना चाहिए और इन्हें साफ-सुथरा रखकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। लेखक ने यह भी कहा कि मानसिकता और शारीरिक स्वास्थ्य का एक-दूसरे पर गहरा प्रभाव पड़ता है, और इसे ध्यान में रखकर औषधियों का चयन करना चाहिए। आखिर में, लेखक ने यह आशा व्यक्त की है कि अगर लोग आयुर्वेद के प्रति जागरूक होंगे और सही जानकारी का उपयोग करेंगे, तो वे अपनी सेहत को बेहतर बना सकेंगे। पाठ का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद की ओर पुनः आकर्षित करना और उनकी स्वास्थ्य संबंधी समझ को बढ़ाना है।
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