वनोषधि रत्नाकर पार्ट-ी | Vanoshdhi Ratnakar Part-i

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: गोपीनाथ पारीक 'गोपेश' - Gopinath Pareek 'Gopesh'
- पृष्ठ : 402
- साइज: 31 MB
- वर्ष: 1955
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दो शब्द :
इस "वनौपधि रत्नाकर" के द्वितीय भाग के प्रकाशन के साथ ही सुधानिधि ने अपने 16वें वर्ष में प्रवेश किया है। पिछले 14 वर्षों में सुधानिधि ने आयुर्वेद के क्षेत्र में कई उपयोगी विशेषांक प्रकाशित किए हैं, जो उसकी उपलब्धियों का प्रमाण हैं। प्रारंभ में, उसने महिला, पुरुष, और शिशु रोगों पर विशेषांक प्रस्तुत किए, जिसके बाद विभिन्न अन्य विषयों पर भी प्रकाशन किया। "वनौषधि रत्नाकर" का पहला भाग बहुत सफल रहा, जिसके बाद द्वितीय भाग को पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया है। इस द्वितीय भाग में पाठकों को विशेष उपयोगिता मिलेगी, जिसमें कुछ औषधियों का वर्णन और आचार्य ने अपने विचार साझा किए हैं। सुधानिधि के पिछले विशेषांक भी पाठकों में लोकप्रिय रहे हैं और जल्दी ही समाप्त हो जाते हैं। सुधानिधि के लघु विशेषांक भी महत्वपूर्ण हैं, जिनमें विभिन्न रोगों पर जानकारी दी जाती है। इस वर्ष विभिन्न नए लघु विशेषांक प्रकाशित किए जाएंगे, जिनमें "कसर रोगांक", "रोगी परीक्षा एवं निदान", "आमवात", और "प्रमेह रोगांक" शामिल हैं। सुधानिधि ने पिछले वर्ष के सर्वश्रेष्ठ लेखों को पुरस्कार देने का निर्णय लिया है, जिसमें विभिन्न पुरस्कार राशि दी जाएगी। आगामी वर्ष में "निदान चिकित्सा विज्ञानाक" का चौथा भाग भी प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें नई जानकारियाँ शामिल होंगी। पाठकों से अनुरोध किया गया है कि वे सुझाव भी भेज सकते हैं और सुधानिधि के नए ग्राहकों को जोड़ने में सहायता करें। सम्पूर्ण सामग्री का उद्देश्य पाठकों को उपयोगी जानकारियाँ प्रदान करना है और सुधानिधि के स्तर को ऊँचा उठाना है।
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