चिंता मुक्त कैसे हो | Chinta Mukt Kaise Ho

By: स्वेट मार्डेन - Swett Marden


दो शब्द :

इस पाठ में चिन्ता और उसके प्रभाव पर चर्चा की गई है। आज का मनुष्य चिन्ता मुक्त और सुखी जीवन की चाह रखता है, लेकिन यह सिर्फ चाहने से संभव नहीं है। चिन्ता और चिता की तुलना की गई है, यह बताते हुए कि चिन्ता व्यक्ति को धीरे-धीरे नष्ट करती है, जबकि चिता एक बार में समाप्त कर देती है। लेखक ने यह भी कहा है कि चिन्ता का उपचार किसी डॉक्टर के पास नहीं है और यह एक गंभीर रोग है। लोगों को यह सलाह दी जाती है कि चिन्ता छोड़ें, लेकिन केवल उपदेश देने से यह संभव नहीं है। इसके लिए एक गहरे समझ वाले व्यक्तित्व की आवश्यकता है जो मन की गहराइयों में जाकर चिन्ता के कारणों को समाप्त कर सके। पाठ में सर विलियम ओसलर का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने चिन्ता को छोड़कर अपने जीवन में सफलता पाई। उन्होंने छात्रों को यह सिखाया कि अतीत और भविष्य की चिन्ता छोड़कर वर्तमान में जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो बीत गया उसे भूल जाएं और भविष्य की चिन्ता न करें, क्योंकि वर्तमान ही सबसे महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, लेखक ने यह समझाया है कि चिन्ता को त्यागने का सही तरीका वर्तमान में जीना और सकारात्मक सोच रखना है, जिससे जीवन में सुख और शान्ति प्राप्त की जा सके।


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