हँसते हँसते कैसे जियें | Hanste Hanste Kaise Jiyen

- श्रेणी: Self-Help and Motivational | स्व सहायता पुस्तक और प्रेरक साहित्य / Literature
- लेखक: स्वेट मार्डेन - Swett Marden
- पृष्ठ : 162
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1965
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दो शब्द :
इस पाठ में जीवन में खुशी और प्रसन्नता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। लेखक ने बताया है कि भय, चिंता, फिक्र, ईर्ष्या, जलन, निराशा और अकर्मण्यता जैसे नकारात्मक भावों को पराजित करना आवश्यक है। जहां प्रेम और उत्साह होते हैं, वहां चिंता और उदासी का स्थान नहीं होता। यदि जीवन में आनंद और प्रसन्नता का अभाव है, तो पुस्तक के अध्ययन से व्यक्ति अपने जीवन को खुशियों से भर सकता है। लेखक ने बताया है कि जीवन में सुख-दुख क्षणिक होते हैं और हमें हमेशा प्रसन्न रहने का प्रयास करना चाहिए। एक सफल व्यक्ति वही है जो संकट में भी मुस्कुराता है और यह जानता है कि संकट अस्थायी होते हैं। उदासीनता और निराशा से बचना चाहिए, क्योंकि ये जीवन को खोखला कर देती हैं। लेखक ने यह भी कहा कि खुश रहने के लिए आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों का होना आवश्यक है। आशा और अभिलाषा पर भी चर्चा की गई है। लेखक का मानना है कि इच्छाएं और सकारात्मक विचार हमें हमारी मंजिल तक पहुँचाने में मदद करते हैं। अगर हम अपने अंदर दृढ़ विश्वास पैदा करें, तो हम अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं। जीवन में आशा का होना आवश्यक है, क्योंकि यह हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। अंत में, लेखक ने यह बताया है कि निराशा, अविश्वास और उत्साहहीनता से दूर रहकर ही हम अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। खुश रहने की आदतें हमें स्वस्थ और सफल बनाती हैं। इसलिए, हमें अपने बच्चों में भी सकारात्मकता और खुश रहने की आदतें विकसित करनी चाहिए ताकि उनका जीवन सुखमय हो सके।
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