तत्वार्थ सूत्र एक ५००१ हिंदी बुक | Tatvarth Sutra Ac 5001 Hindi Book

- श्रेणी: जैन धर्म/ Jainism दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy धार्मिक / Religious
- लेखक: श्रुतसागर जी मुनिराज - Shrutsagar ji Muniraj सुदीप जैन - Sudeep Jain
- पृष्ठ : 369
- साइज: 10 MB
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ का समर्पण परम पूज्य राष्ट्र संत दिगम्बराचार्य श्री 08 विद्यानन्द जी महाराज के शिष्य गणधराचार्य श्री 08 कुन्धुसागर जी महाराज को किया गया है। इस पाठ में आचार्य गृद्धपिच्छ-उमास्वामी द्वारा रचित 'तत्त्वार्थसूत्र' का उल्लेख है, जो जैन दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें जीव और अजीव, मोक्ष, सम्यग्दर्शन, और अन्य जैन तत्त्वों का विस्तार से वर्णन किया गया है। 'तत्त्वार्थसूत्र' की रचना लगभग 2000 वर्ष पूर्व हुई थी और यह ग्रंथ केवल दस अध्यायों में जैन तत्त्वज्ञान को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। आचार्य उमास्वामी, जो कुन्दकुन्द के शिष्य थे, ने इस ग्रंथ के माध्यम से जैन सिद्धांतों को सूत्रबद्ध किया। ग्रंथ की विशेषता यह है कि इसके छोटे-छोटे सूत्रों में गहरी विचारधारा समाहित है, जिससे विद्वानों ने अनेक टीकाएं और व्याख्याएं लिखी हैं। इस ग्रंथ का उद्देश्य श्रावक-श्राविकाओं को जैन दर्शन को सरलता से समझाना है। इसके संपादन में डॉ. सुदीप जैन का योगदान महत्वपूर्ण है, जिन्होंने इसे हिंदी में प्रश्नोत्तर शैली में प्रस्तुत किया है। पाठ में उपाध्याय भ्रुतसागर मुनि और अन्य विद्वानों का भी उल्लेख है, जिन्होंने इस ग्रंथ के महत्व को समझाया है और इसे समाज के लिए उपयोगी बनाने का प्रयास किया है। इस प्रकार, 'तत्त्वार्थसूत्र' जैन दर्शन का सार प्रस्तुत करता है और इसके अध्ययन से कोई भी व्यक्ति जैन सिद्धांतों का ज्ञाता बन सकता है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.